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8 सेकेंड पहले ही पता चल जाता हर बॉल का खेल, ऐसे लगाया जा रहा था IPL में करोड़ों का सट्टा


स्टार इंडिया ने 16,347.50 करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली लगाकर बीसीसीआई से वर्ष 2018 से 2022 तक के लिए आईपीएल मैचों के मीडिया (टीवी और डिजिटल) अधिकार खरीदे हैं

इंदौर: आईपीएल 2018 टूर्नामेंट के 27 मई को मुंबई में खेले जाने वाले फाइनल से पहले मध्यप्रदेश पुलिस के साइबर दस्ते ने सट्टेबाजी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा करते हुए इसके एजेंट को धर दबोचा है. तकनीकी रूप से बेहद शातिर गिरोह आईपीएल मैचों के सीधे प्रसारण के आधिकारिक सिग्नल चुराकर एक वेबसाइट पर इनकी लाइव स्ट्रीमिंग कर रहा था. इसके जरिये सट्टेबाज टीवी की तुलना में आठ सेकेंड पहले ये टी-20 मुकाबले देखकर कथित रूप से करोड़ों रुपए के दांव लगा रहे थे. राज्य साइबर सेल की इंदौर इकाई के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि प्रसारण क्षेत्र की कम्पनी स्टार इंडिया की शिकायत पर गहन जांच के बाद सट्टेबाजी गिरोह के एजेंट अंकित जैन उर्फ मुन्नू जॉकी को सूबे के विदिशा जिले से गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि वह कई लोगों से आईपीएल मैचों पर लाखों रुपये का सट्टा लगवा चुका है. 


गौरतलब है कि स्टार इंडिया ने 16,347.50 करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली लगाकर बीसीसीआई से वर्ष 2018 से 2022 तक के लिए आईपीएल मैचों के मीडिया (टीवी और डिजिटल) अधिकार खरीदे हैं. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले में गिरफ्तार एजेंट सट्टेबाजी गिरोह के फरार सरगना अमि​त मजीठिया के सीधे संपर्क में था. मजीठिया मूलत: गुजरात का रहने वाला है. उसके फिलहाल दुबई में होने का संदेह है. 


सिंह ने बताया कि मजीठिया का गिरोह "सीबीटीमैजिकबॉक्स.इन" नाम की वेबसाइट चला रहा था. वेबसाइट के नाम में शामिल शुरूआती चार अक्षरों-सी बी टी एफ का फुल फॉर्म "क्रिकेट बेटिंग टिप्स फॉर फ्री." है. 

यह गिरोह आईपीएल मैचों के उन ​सिग्नलों को किसी अत्याधुनिक तकनीकी के इस्तेमाल से चुरा रहा था, जो स्टार इंडिया द्वारा आधिकारिक तौर पर प्रसारित किये जा रहे थे. चुरायी गई वीडियो फीड लाइव स्ट्रीमिंग के जरिये सीधे वेबसाइट पर जारी की जा रही थी और इस अवैध प्रसारण के जरिये सट्टेबाजी के दांव लगाये जा रहे थे. 

उन्होंने बताया, "बेहद चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोह अपनी वेबसाइट पर आईपीएल मैचों की रॉ फीड (विज्ञापनों और अन्य कार्यक्रमों के बगैर इन मुकाबलों के सीधे दृश्य) जारी कर रहा था. यही नहीं, इस वेबसाइट पर टीवी की तुलना में आठ सेकंड पहले आईपीएल मैचों का सीधा प्रसारण देखा जा रहा था. हमें पक्का संदेह है कि आठ सेकंड के इस अंतर का बेजा फायदा उठाकर सट्टेबाजों ने करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे किये होंगे." 



सिंह ने हालांकि बताया कि यह तकनीकी गुत्थी फिलहाल नहीं सुलझ सकी है कि आईपीएल मैचों के सिग्नल चुराने के बाद इन्हें वेबसाइट पर सीधे प्रसारित करने के गोरखधंधे को किस तरह अंजाम दिया जा रहा था. इस रहस्य के भंडाफोड़ के लिये तकनीक के जानकारों की मदद ली जा रही है.



उन्होंने यह भी बताया कि आईपीएल मैचों का अवैध प्रसारण करने वाली वेबसाइट की लिंक गिरोह के प्रमुख लोगों और चुनिंदा एजेंटों को ही भेजी जाती थी. एजेंट इस वेबसाइट पर टीवी के मुकाबले आठ सेकंड पहले ही आईपीएल मैच की वास्तविक स्थिति देख लेते थे. इसके बूते वे लोगों को मोटा फायदा कराने का लालच देकर सट्टेबाजी की "टिप्स" देते थे और उन्हें बड़े दांव लगाने के लिये कहते थे. 


पुलिस अधीक्षक ने बताया कि​ गिरोह के तीन अन्य लोगों के भी भारत से बाहर होने के सुराग मिले हैं. इनमें मुंबई का तथाकथित बिल्डर ​हितेश खुशलानी, गुजरात निवासी हरेश चौधरी और उसकी पत्नी पूनम शामिल हैं.


उन्होंने बताया कि गिरोह के फरार सदस्यों की गिरफ्तारी के लिये उच्चस्तरीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है. मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड विधान की सम्बद्ध धाराओं के तहत प्राथामिकी दर्ज की गई है. विस्तृत जांच जारी है.

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